Nuclear Energy India
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम उसकी दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा का एक आधारशिला है और शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक रणनीतिक मार्ग है। अपने विशाल स्वदेशी थोरियम भंडार का लाभ उठाते हुए, देश आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा स्वतंत्रता बढ़ाने के उद्देश्य से एक त्रि-स्तरीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम चला रहा है। इस महत्वाकांक्षी प्रयास को परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 द्वारा नियंत्रित किया जाता है और परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) और भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) जैसे प्रमुख संस्थानों द्वारा संचालित किया जाता है। स्वदेशी ईंधन चक्रों और प्रौद्योगिकी विकास पर ध्यान सतत आर्थिक विकास और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के लिए इसके महत्व को रेखांकित करता है, जिससे यह प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण विषय बन जाता है।
मुख्य तथ्य
- •संस्थागत: परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) की स्थापना 1954 में भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए नोडल एजेंसी के रूप में की गई थी।
- •संवैधानिक/वैधानिक: परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962, भारत में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के विकास, नियंत्रण और उपयोग के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- •संस्थागत: परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों की रणनीतिक योजना और निष्पादन के लिए जिम्मेदार है।
- •संस्थागत: भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) की स्थापना 1987 में परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों के डिजाइन, निर्माण और संचालन के लिए की गई थी।
- •नीति: भारत का त्रि-स्तरीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करना चाहता है।
- •संसाधन: भारत के पास महत्वपूर्ण स्वदेशी थोरियम भंडार हैं, जो उसकी भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- •लक्ष्य: थोरियम को परमाणु ईंधन स्रोत के रूप में उपयोग करना भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और उसके शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- •रणनीति: यह कार्यक्रम आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए परमाणु प्रौद्योगिकी और ईंधन चक्रों के स्वदेशी विकास पर जोर देता है।
- •लक्ष्य: परमाणु ऊर्जा का विकास भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में योगदान देता है।
- •आर्थिक: परमाणु ऊर्जा का रणनीतिक महत्व ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के माध्यम से आर्थिक विकास को प्रभावित करता है।
संवैधानिक एवं स्टेटिक लिंक
- ⚖Atomic Energy Act, 1962 — provides for the development, control, and use of atomic energy for peaceful purposes.
- ⚖Department of Atomic Energy (DAE) — established 1954, responsible for research, development, and deployment of nuclear energy.
- ⚖Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) — established 1987, responsible for design, construction, and operation of nuclear power reactors.
- ⚖Seventh Schedule, List I (Union List), Entry 6 — 'Atomic energy and mineral resources necessary for its production.'
कालक्रम
1954
Department of Atomic Energy (DAE) established.
1962
Atomic Energy Act enacted.
1987
Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) established.
हाल के अपडेट
Thorium as nuclear fuel for India's energy needs
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मेंस थीम
उत्तर संरचना
PYQ पैटर्न
- PYQUPSC GS3 (202X): Critically analyze India's three-stage nuclear power program, highlighting the challenges and opportunities in utilizing thorium for long-term energy security and climate change mitigation.
- PYQUPPSC GS3 (202X): Discuss the institutional framework governing nuclear energy in India. How effectively have bodies like DAE and NPCIL promoted indigenous technology and energy independence, particularly for states with high energy demands like Uttar Pradesh?